हैड्रोजेन रिच वाटर प्यूरीफायर के फायदे . पढें ****
*आधुनिक वाटर प्यूरीफायर और बीमारियां*
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*हैड्रोजेन रिच वाटर प्यूरीफायर के फायदे . *FEDULA TRADING*
जानिए कितना महत्वपूर्ण है *alkaline + ORP Negative +Micro clusterd*
तमाम तरीके की चिकित्सा पद्धती के उपलब्धता के बाद भी शायद ही कोई ऐसा ब्यक्ति हो,जो निरोग हो।दुनिया भर मे फूड सप्लिमेन्ट कम्पनियो का जाल बिछा हुआ है।जिनका अरबो मे ट्रान्जेकशन है।मतलब दुनिया भर मे कम्पनियो द्वारा बेचे गये प्रोडक्ट लोग इस्तेमाल कर रहे हैं।फिर भी बिमारो की संख्या कम नही हो रहा है।अब लोग पहले की तुलना मे ज्यादा जागरुक हुए हैं,इसीलिए सुबह सुबह सड़को पर टहलने वाले लोगो की संख्या लगातार बढ रही है।और योगा के प्रति भी दुनियाभर मे लोग जागरुक हुए है ।इसके बावजूद अस्पताल और अस्पताल मे मरीजो की संख्या लगातार बढ रही है।अब समझने वाली बात ये है कि इन सारे प्रयत्नो के बाद भी आखिर लोग बिमार क्यो हो रहे है?इसके पिछे जो मुल कारण है,उसे समझने की जरुरत है।ये हम सभी जानते है कि हमारे शरीर का जितना वजन है,उसका 72% वजन पानी के वजह से है। और बाकी 28% मे हड्डी मांस है। हम सभी लोग 28% हिस्से को ठीक करने के लिए तो बहुत सारा प्रयास करते हैं।परन्तु 72% पानी वाले हिस्से को लेकर लापरवाह हैं।
और पीने के पानी को लेकर दुनिया मे तरह तरह की भ्रान्तियां भी बहुत हैं।आज मै आप को पानी के बारे मे एक ऐसे तथ्य से परीचित कराने जा रहा हूं जो पानी के मामले मे आप के मष्तिस्क मे मौजूद भ्रान्ती को दुर कर देगा।आज भी दुनिया मे कई जगह ऐसे हैं जहां पर लोगो की औसत आयु 100 वर्ष से ज्यादा है।ऐसे कुछ जगह से आप से परिचय कराता हूं।शायद आप हिमालय के ग्लेशियर छेत्र से परिचित होंगें। वहा पर आज भी लोग 100 वर्ष से ज्यादा जीवित रहते हैं।और वहां के लोग बिमार भी नही पड़ते हैं।
दूसरा जगह है हम्जा वैली ,वहां के लोग भी 100 वर्ष से लम्बी आयु तक स्वस्थ जीवन जीते हैं। ऐसे ही शायद आप अबे जमजम कुआं का नाम सुने हो सकते है,जिसका पानी पीने से कई प्रकार के असाध्य रोग ठीक हो जाते है
अंततः बुद्धिजीवी लोगो को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि इन जगहो के पानी मे ऐसा क्या है जिसके वजह से यहा के लोग लम्बे समय तक जीवित रहते हैं और बिमार भी नही होते है।और फिर यहा के पानी पर रिसर्च सुरू हुआ।रिसर्च के बाद ये पाया गया कि यहा के पानी मे तिन ऐसे गुण मौजूद हैं,जो बाकी दुनिया के पानी मे नही है
1- वहां के पानी का *ORP Nigative* है।. 2- वहां का पानी *alkaline* है।
3- वहां का पानी *Micro clusterd* है।
इसका मतलब यह हुआ कि स्वस्थ रहने के लिए पीने वाले पानी मे उक्त गुण का होना आवश्यक है।और यह गुण जो पानी हम लोग पीते हैं,उसमे मौजूद नही है।और ईसी वजह से हम लोग बिमार पड़ते है।
अब आइये समझते है ORP क्या है?ORP को आक्सीडेसन रीडक्सन पोटेन्सियल कहते है। पीने वाला पानी यदि *Positive ORP* का है तो हमारे शरीर मे आक्सीकरण की प्रक्रिया होगी और यदि पानी *Nigative ORP* का है तो एन्टी आक्सीकरण होगा।
उदाहरण के तौर पर आक्सीकरण को जानने की कोशीश करते है।आप कभी न कभी सेब जरुर काटे होंगे।कटे हुए सेब मे आप देखे होंगे, कुछ समय बाद भूरे रंग का एक परत बन जाता है।वह आक्सीकरण के प्रक्रिया के वजह से बनता है।वैसे ही लोहे मे जंग आक्सीकरण की प्रक्रिया से ही लगता है।ऐसे ही *Positive ORP* का पानी पीने से शरीर मे आक्सीकरण होने के वजह से अर्गन के ऊपर टाकसीन जमना शुरु हो जाता है अर्गन को सही दिशा मे कार्य करने से रोकता है जिससे हमारे शरीर का आन्तरिक क्रिया प्रभावित होती है।परिणाम स्वरुप कई भयानक रोग हमारे शरीर मे जन्म लेता है। *NigatIve ORP* का पानी पीने से स्वतः से हमारे शरीर मे एन्टीआक्सीडेन्ट का गुण विकसीत हो जाता है,जिससे हमारे शरीर के अन्दर हाने वाले आक्सीकरण पर रोक होता है और टाक्सीन नही बनता है।जिससे हमारा शरीर स्वस्थ होता है, और हम कई प्रकार के भयानक बिमारियो से बच जाते हैं। इसीलिए जो पानी हम पीते हैं, उसका *ORP Nigative* होना बहुत आवश्यक है।-------------------------------
पीने के पानी एल्कलाइन होना बहुत जरुरी है।और पानी एल्कलाइन तब होता है जब उसका PH-7 से ऊपर हो,तो आइए जानते है कि PH क्या है?
कोई भी रोग हो चाहे कि कैंसर ही Alkaline वातावरण में पनप नहीं सकता – डॉक्टर Otto Warburg
दोस्तों कई दिनों से हम सोच रहे थे कि हम पानी के बारे मे आपको एक ऐसी चीज बताएं जिससे की आपके शरीर के सभी रोग स्वतः ही समाप्त हो जाए, जैसे *डायबिटीज, कैंसर, हार्ट, ब्लड प्रेशर, जोड़ों का दर्द, UTI – पेशाब के रोग, Osteoporosis, सोरायसिस, यूरिक एसिड का बढ़ना, गठिया – Gout, थाइरोइड, गैस, बदहजमी, दस्त, हैजा, थकान, किडनी के रोग, पेशाब सम्बंधित रोग, पत्थरी* और अन्य कई प्रकार के जटिल रोग. इन सबको सही करने का सबसे सही और सस्ता उपयोग है शरीर को एल्कलाइन कर लेना। डाक्टर अट्टो वरबर्नेग ने इसके बारे में क्या खूब कहा है कि–
*“No Disease including cancer, can exist in an alkaline envioronment” Dr. Otto Warburg – Noble Prize Winner 1931*
*आज हम आपको बता रहें हैं कि कैसे शरीर को करें एल्कलाइन और कैसे हो रोग मुक्त और क्या है इसका राज़?*
तो आइए जानते हैं कि- पी एच लेवल क्या है?
इसको समझने के लिए सबसे पहले आपको PH को समझना होगा, हमारे शरीर में अलग अलग तरह के द्रव्य पाए जाते हैं, उन सबकी PH अलग अलग होती है, हमारे शरीर की सामान्य Ph 7.35 से 7.41 तक होती है, PH पैमाने में PH 1 से 14 तक होती है, 7 PH न्यूट्रल मानी जाती है, यानी ना एसिडिक और ना ही एल्कलाइन. 7 से 1 की तरफ ये जाती है तो समझो एसिडिटी बढ़ रही है, और 7 से 14 की तरफ जाएगी तो Alkalinity क्षारीयता बढ़ रही है. अगर हम अपने शरीर के अन्दर पाए जाने वाले विभिन्न द्रव्यों की PH को Alkaline की तरफ लेकर जाते हैं।तो हम बहुत सारी बीमारियों के मूल कारण को हटा सकते हैं, और उनको हमेशा के लिए Cure कर सकते हैं।
जैसे
*cancer and PH –* कैंसर
उदहारण के तौर पर सभी तरह के कैंसर सिर्फ *Acidic Environment* में ही पनपते हैं। क्यूंकि कैंसर की कोशिका में शुगर का ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में Fermentation होता है जिससे अंतिम उत्पाद के रूप में लैक्टिक एसिड बनता है और यही लैक्टिक एसिड *Acidic Environment* पैदा करता है जिस से वहां पर एसिडिटी बढती जाती है और कैंसर की ग्रोथ बढती जाती है।और ये हम सभी जानते हैं के कैंसर होने का मूल कारण यही है की कोशिकाओं में ऑक्सीजन बहुत कम मात्रा में और ना के बराबर पहुँचता है। और वहां पर मौजूद ग्लूकोस लैक्टिक एसिड में बदलना शुरू हो जाता है।
*Gout and PH – गठिया*
दूसरा उदहारण है
Gout जिसको गठिया भी कहते हैं, इसमें रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे रक्त एसिडिक होना शुरू हो जाता है, जितना ब्लड अधिक एसिडिक होगा उतना ही यूरिक एसिड उसमे ज्यादा जमा होना शुरू हो जायेगा। अगर हम ऐसा पानी पीएं जिससे हमारा पेशाब Alkaline हो जाए तो ये बढ़ा हुआ यूरिक एसिड Alkaline Urine में आसानी से बाहर निकल जायेगा।
*UTI and PH – पेशाब का संक्रमण*
तीसरा उदहारण है के UTI जिसको *Urinary tract infection* कहते हैं, इसमें मुख्य रोग कारक जो बैक्टीरिया है वो *E.Coli* है, ये बैक्टीरिया एसिडिक वातावरण में ही ज्यादा पनपता है।इसके अलावा *Candida Albicanes* नामक फंगस भी एसिडिक वातावरण में ही ज्यादा पनपता है. इसीलिए UTI तभी होते हैं जब पेशाब की PH अधिक एसिडिक हो।
*Kidney and PH –* किडनी
चौथी एक और उदाहरण देते हैं जिसमे किडनी की समस्या मुख्यतः एसिडिक वातावरण में ही होती है, अगर किडनी का PH हम एल्कलाइन कर देंगे तो किडनी से सम्बंधित कोई भी रोग नहीं होगा। मसलन क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड, पत्थरी इत्यादि समस्याएँ जो भी किडनी से सम्बंधित हैं वो नहीं होंगी।
*वर्तमान स्थिति*
आजकल हम जो भी भोजन कर रहें हैं वो 90 प्रतिशत तक एसिडिक ही है, और फिर जो पानी हम पी रहे हैं उसका भी पी एच लेबल होता है। तब हमारा सवाल होता है की हम सही क्यों नहीं हो रहे?
या फिर कहते हैं कि हमने ढेरों इलाज करवाए मगर आराम अभी तक नहीं आया। बहुत दवा खायी मगर फिर भी आराम नहीं हो रहा है।तो उन सबका मुख्यः कारण यही है कि उनका PH लेवल कम हो जाना अर्थात एसिडिक हो जाना।
आज हम इसी विषय पर बात करेंगे के कैसे हम अपना *PH level* बढ़ाएं और इन बिमारियों से मुक्ति पायें।
उपरोक्त किसी भी प्रकार की समस्या से छुटकारा पाने के लिए हमे सिर्फ अपना पानी जिसे हम पीते हैं,को एल्कलाईन बनाना है।----------------------------'----
ऐसे ही पानी के मामले मे जो तिसरा महत्वपुर्ण तथ्य है वो पानी का माइक्रोकलस्टर्ड होना है। जो पानी हम लोग पीते है उसमे पानी के प्रति माल्युकुल मे 15-20 गुच्छे होते है जो हमारे शरीर के सेल मे आसानी से प्रवाहित नही हो पाता है जिसके कारण सेल तक आक्सीजन और न्युट्रीएन्ट पहुच नही पाता है।जिसके परिणाम स्वरुप सेल अस्वस्थ होने लगता है।फलतः बहुत सारी बिमारिया हमारे शरीर मे जन्म ले लेती है।अगर पीने वाला पानी माइक्रोकलस्टर्ड होगा, तो उसके प्रति माल्युकुल मे 3-5 गुच्छा होगा जिससे आसानी से पानी हमारे सेल तक पहुच जाता है।जिससे हमारे सेल को आसानी से आक्सीजन और न्युट्रीएन्ट मिल जाता है।जिससे हमारा सेल स्वस्थ होता है।और हम स्वस्थ होने लगते है।
यही सब प्रमुख कारण है कि तमाम प्रयत्नो के बाद भी हम स्वस्थ नही हो पा रहे हैं। मतलब यह कि अगर स्वस्थ रहना है तो उक्त गुणो से युक्त पानी पीना हम सब लोगो के लिए बहुत आवश्यक है।
अतः अपने घरों में *यही* वाटर प्यूरीफायर प्रयोग करे जिसमे बायो का *AAA+ORP* फिल्टर्स प्रयोग किये जाते है जिससे प्राप्त पानी अल्कलाइन युक्त एवं निगेटिव ओ0 आर0 पी0 का होता है।
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